Hypothyroidism kya hai | हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण, कारण और इलाज – सम्पूर्ण जानकारी

Hypothyroidism problem in hindi

Hypothyroidism क्या है इसके लक्षण, कारण और इससे कौन कौन सी समस्याएं होती है

हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी थायरॉयड का ही रूप है हाइपोथायरायडिज्म को अंडरएक्टिव थायरॉयड (Underactive thyroid) के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती है। हाइपोथायरायडिज्म Hypothyroidism की बीमारी होने के कारण महिलाओं की थायरॉइड ग्रन्थि हार्मोन्स पैदा नहीं कर पाती है। जानिए Hypothyroidism kya hai इसके कारण, लक्षण और हाइपोथायरायडिज्म के कारण होने वाली समस्याएं क्या है।

हमारे शरीर में बहुत सी ऐसी बीमारियां भी होती है जो शरीर में लगातार बढ़ती रहती है लेकिन इनके लक्षण लंबे समय तक सामने नहीं आ पाते हैं। लेकिन जब तक लक्षण सामने आते हैं तो बीमारी शरीर में पूरी तरह से अपने पांव जमा लेती है।

Hypothyroidism in hindi / क्या है हाइपोथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म बीमारी महिलाओं में एक आम बीमारी है इसके लक्षण (Symptoms of hypothyroidism) भी अक्सर महिलाएं नजरअंदाज करती रहती है। पिछले कुछ समय से यह बीमारी काफी तेजी से बढ़ रही है। पुरुषों में Hypothyroidism बीमारी बहुत कम देखी जा सकती है लेकिन महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह बीमारी भी बढ़ रही है।

हाइपोथायरायडिज्म क्या है (What is Hypothyroidism)

यह एक थायरॉइड का ही रूप होता है। हाइपोथायरायडिज्म को अंडरएक्टिव थायरॉइड (Underactive thyroid) भी कहा जाता है। यह एक प्रकार की सामान्य बीमारी है जो अक्सर पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में अधिक होती है। गर्दन के अंदर और कॉलरबोन के ठीक ऊपर स्थित तितली के आकार की ग्रंथि को थायराइड करते हैं।

यह ट्राईआयोडोथायरोनित यानी T3 और थायरोक्सिन यानी T4 नामक दो हॉर्मोन का निर्माण करती है। यह दोनों हॉर्मोन मेटाबॉलिज्म के लिए महत्वपूर्ण होते है। इन दोनों हॉर्मोन का स्राव या उत्पादन थायराइड सिटमुलेटिंग हॉर्मोन यानी T S H के द्वारा किया जाता है। इनके स्राव या उत्पादन को थायराइड रिलीज करने वाले हॉर्मोन या टी आर एच नियंत्रण करता है। इस स्तिथि में जब थायरॉइड सामान्य से अधिक या कम होता है तब शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है।

जब बॉडी में थायरॉइड के ज्यादा मात्रा में बनने के कारण टी-3 व टी-4 के स्तर में बढ़ोतरी होती है। तथा टीसीएच के स्तर में कमी होती है। यह हाइपरथाइरॉयडिज़्म कहलाता है।

जब शरीर में थायरॉयड हॉर्मोन का निर्माण कम होने लगता  तो T-3 व T4 का स्तर भी घटने लगता है तथा टीसीएच का स्तर बढ़ने लगता है इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं।

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हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण (Symptoms of hypothyroidism in hindi)

शुरुआत में हाइपोथायरायडिज्म के अधिक लक्षण दिखाई नहीं देते है लेकिन जब मेटाबॉलिज्म की कार्यक्षमता की गति धीमी होने लगती है। तब इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि अगर किसी का वजन तेजी से बढ़ने या घटने लगे तो यह थायराइड के कारण हो सकता है इसके अलावा इसके और भी लक्षण होते हैं जैसे

  • धुंधला दिखाई देना
  • लगातार थकान महसूस होना
  • किसी चीज पर फोकस करने में दिक्कत होना
  • याददाश्त का कमजोर होना
  • वजन का बढ़ना या कम होना
  • आवाज बदलना
  • सोचने समझने की शक्ति कमजोर होना

अगर समय पर इसका उपचार नहीं किया जाए तो इसके लक्षण बढ़ने लगते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म का मुख्य कारण (Hypothyroidism ke karan)

हमारे शरीर में थायराइड गर्दन में एक छोटी ग्रंथि होती है। जिसका मुख्य काम मेटाबॉलिज्म क्रिया को कंट्रोल करने वाले हारमोंस का निर्माण करना होता है। हाइपो थायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि कुछ मुख्य हार्मोन्स का उत्पादन नहीं कर पाती है। और समय के साथ-साथ हाइपोथायरायडिज्म कई समस्याएं पैदा करने लगती है।

लेकिन इस बीमारी की शुरुआत में इसके लक्षण ज्यादा दिखाई नहीं देते हैं ऐसे में इस रोग की पहचान करना मुश्किल होता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने का मुख्य कारण आयोडीन की कमी ही होता है।

हाइपोथाइरॉएडिज्म के कारण होने वाली समस्याएं (Hypothyroidism problem)

Hypothyroidism

धुंधला या कम दिखाई देना

थायराइड के कारण आंखों के पास मौजूद टिशू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसके कारण आंखों को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां बड़ी होने लगती है। और व्यक्ति को कम व धुंधला दिखाई देना तथा डबल विजन जैसी समस्याएं पैदा होने लगती है। तथा इसके कारण किसी चीज पर फोकस करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मुंह का स्वाद बदलने लगना

अगर शरीर का थायराइड सिस्टम प्रभावित होता है या ठीक तरह से काम नहीं करता है। तो मुंह व मस्तिष्क की स्वाद ग्रंथियां प्रभावित हो जाती है। जिसके कारण मुंह का स्वाद बदलने लगता है।

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तनावग्रस्त रहना

हाइपोथायराइडिज्म की समस्या के कारण डिप्रेशन व एंग्जाइटी की समस्या बढ़ने लगता है। डिप्रेशन थायराइड का मुख्य लक्षण होता है। इसलिए एंग्जाइटी के कारण व्यक्ति का मूड लगातार बदलता रहता है और दिमागी तनाव की समस्या बढ़ती है। क्योंकि हाइपोथायरायडिज्म मानसिक गति को धीमा कर सकता है।

हृदय संबंधी समस्याएं होना

यह दिल संबंधी रोगों के जोखिम को बढ़ाता है। जिसके कारण कोलेस्ट्रोल का स्तर भी बढ़ने लगता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर का स्तर भी पूर्ण रूप से बढने लगता है। साथ ही यह हार्ट की पंपिंग क्षमता को भी कमजोर करता है। हाइपोथायरायडिज्म हृदय के आकार में भी अनुचित वृद्धि और हृदय गति रुक जाने तक का कारण भी बन सकता है।

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हाइपोथायरायडिज्म का इलाज (Hypothyroidism ka ilaj) इसके लक्षणों और गंभीरता के अनुसार किया जा सकता है। लेकिन सामान्यत इस के इलाज के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती है। नियमित खानपान व जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी हाइपोथायराइडिज्म की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस आर्टिकल में हमने जाना (What is Hypothyroidism) हाइपोथायरायडिज्म क्या है इसके लक्षण और कारण क्या है तथा हाइपोथायरायडिज्म के कारण होने वाली समस्याएं कौन कौन सी है। इस लेख के बारे में आपके कोई भी सुझाव या सवाल हो तो कमेंट में लिख सकते हैं।

यह लेख हाइपोथायरायडिज्म क्या है (Hypothyroidism in hindi) आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताएं तथा लेख को सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर अवश्य करें।

-: लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद :-

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