विटामिन डी की कमी क्या है| विटामिन डी के आहार | Vitamin D deficiency

विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें (Vitamin D 3 foods in hindi) विटामिन डी के फायदे

Vitamin D deficiency in hindi

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, पोषक तत्व और विटामिन बहुत आवश्यक होते हैं। विटामिन डी की कमी (Vitamin d deficiency in hindi) होने से शरीर में हड्डियां कमजोर होने के साथ-साथ स्वास्थ्य में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम और विटामिन की आवश्यकता होती है। कुछ घरेलू टिप्स और आहार से Vitamin D deficiency को दूर किया जा सकता है।

निरोगी हेल्थ के इस आर्टिकल में जानेगे Vitamin D deficiency क्या है, विटामिन डी के घरेलू उपचार, विटामिन डी बढ़ाने के लिए क्या करें, आइए जानते हैं विटामिन डी की कमी क्या है| विटामिन डी के आहार | Vitamin D deficiency

विटामिन डी क्या है – what is vitamin d in hindi

आज के समय में फास्ट फूड, जंक फूड, मैदा से बनी चीजों आदि का सेवन अधिक मात्रा में करने के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व और विटामिन नहीं मिल पाते हैं। शरीर की हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए Vitamin D बेहद आवश्यक है। कुछ मात्रा में यह हमें भोजन से प्राप्त होता है।

लेकिन इसका मुख्य स्रोत सूर्य की किरणें होती है। कैल्शियम का अवशोषण, हड्डियों का स्वास्थ्य, सूजन कम करने और कोशिकाओं के विकास आदि के लिए विटामिन D बहुत लाभदायक होता है।

हमारा शरीर सूर्य की किरणों के संपर्क में आने पर कोलेस्ट्रोल से इसका निर्माण करता है। यह वसा में घुलनशील  होता है। यह कुछ खाद्य पदार्थों में पाया जाता है जैसे दूध, मछली, डेयरी उत्पाद आदि लेकिन शरीर को केवल 10 फ़ीसदी विटामिन डी भोजन से मिलता है। बाकी 90 फ़ीसदी सूर्य की रोशनी (किरणों) से प्राप्त किया जा सकता है।

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विटामिन डी की कमी के लक्षण क्या है – Vitamin d deficiency symptoms in hindi

  • Vitamin D  की कमी होने पर बालों का सफेद होना और बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं। इसकी कमी से बालों का विकास होना भी कम हो जाता है।
  • Vitamin-d  की कमी यानि Vitamin D deficiency होने से शरीर के सभी हिस्सों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • इसकी  कमी होने पर बार बार बीमार होने के लक्षण उत्पन्न होते हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य रोग जैसे सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार आदि समस्याएं उत्पन्न होती है।
  • मन उदास रहना व चिड़चिड़ापन नियमित महसूस करना विटामिन डी की कमी के लक्षण होते हैं।
  • इसकी  कमी के कारण अधिक पसीना आने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है। मुख्यतः सिर में पसीना आना विटामिन डी की कमी के शुरुआती लक्षणों में से एक होता है।
  • इसकी कमी (Vitamin D deficiency) हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित करती है। इसकी कमी होने पर हड्डियों और घुटनों व कमर में दर्द होना आम बात होती है। हड्डियों में दर्द के साथ फैक्चर होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
  • विटामिन D वसा में घुलनशील विटामिन होने के कारण इसकी कमी से पाचन क्रिया से संबंधित बीमारियां उत्पन्न होती है।
  • अचानक शरीर का वजन बढ़ना या मोटापा होना इसकी कमी के लक्षण होते हैं। क्योंकि विटामिन डी वसा में घुलनशील होता है।
  • VITAMIN- D हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसलिए इसकी कमी होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होकर शरीर में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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विटामिन डी की कमी के कारण क्या है – Vitamin d deficiency causes in hindi

हमारे शरीर में विटामिन D की कमी यानि Vitamin D deficiency के बहुत से कारण होते हैं जैसे

  • पर्याप्त मात्रा में सूर्य की रोशनी न लेने के कारण
  • अपने नियमित आहार से विटामिन डी की पूर्ति न होने के कारण
  • किडनी और लीवर के द्वारा विटामिन डी को सक्रिय रूप मैं परिवर्तित ना करने के कारण
  • ज्यादा मात्रा में दवाओं का सेवन करने के कारण विटामिन डी की कमी हो सकती है।
  • अधिक मोटापे के कारण विटामिन डी का ब्लड में प्रवेश न होने के कारण
  • उम्र अधिक होने पर त्वचा सूर्य की किरणों से पर्याप्त विटामिन D का निर्माण नहीं कर पाती है इसके कारण इसकी कमी हो जाती है।

विटामिन डी की पूर्ति के लिए आहार – Vitamin d deficiency treatment food in hindi

डेयरी प्रोडक्ट्स

डेयरी प्रोडक्ट्स VITAMIN – D की पूर्ति करने में सहायक होते हैं। इसके लिए गाय के दूध का सेवन, पनीर, दही, मक्खन छाछ, क्रीम आदि का सेवन करना लाभदायक होता है।

गाजर का सेवन

विटामिन D की कमी को दूर करने में गाजर या गाजर का ज्यूस काफी फायदेमंद होता है। इसलिए गाजर के ज्यूस का नियमित सेवन करने से लाभ मिलता है।

संतरे का सेवन

संतरे में विटामिन सी और डी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। सर्दियों के मौसम में विटामिन D की कमी की पूर्ति करने के लिए नियमित अपनी डाइट में संतरे का या संतरे के ज्यूस का सेवन करना लाभदायक होता है।

मशरूम का सेवन

विटामिन डी की कमी दूर करने के लिए मशरूम का सेवन करना भी फायदेमंद होता है। जो कुछ इसकी की पूर्ति करने में सहायता करता है। इसके अलावा मशरूम में पाए जाने वाले पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी उपयोगी होते हैं।

बादाम का सेवन

बादाम में विटामिन D प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। बादाम में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे शरीर को शारीरिक के साथ-साथ मानसिक समस्याओं से बचाने में भी सहायक होते हैं। बादाम का सेवन दूध के साथ करने से विटामिन डी और कैल्शियम की पूर्ति होती है। जो हड्डियों को मजबूत करने के साथ-साथ उनके विकास में भी सहायक है।

विटामिन डी की कमी से बचने के उपाय – Vitamin d deficiency prevention iin hindi

VITAMIN डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना और नियमित 20 से 25 मिनट सुबह की धूप व सूर्य की रोशनी लेना इसकी पूर्ति करने का सबसे प्रभावी तरीका होता है।

  • खाद्य पदार्थों और सूर्य की रोशनी के अलावा जीवन शैली भी शरीर में विटामिन D के स्तर को स्वस्थ बनाए रखने में सहयोगी होती है।
  • नियमित योग, व्यायाम व शारीरिक एक्टिविटी करना और वजन भी संतुलित रखना इसकी पूर्ति के लिए आवश्यक होता है।
  • सर्दियों के अंत में और बसंत ऋतु के शुरुआत में, इन दोनों मौसम में विटामिन डी का स्तर शरीर में बहुत कम होता है। इसलिए इस समय इसकी पूर्ति का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • अपने नियमित आहार में विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थों को अवश्य शामिल करना चाहिए सूरजमुखी के बीज भी Vitamin D deficiency में सहायक होते है।
  • सुबह के समय व्यायाम व योग करने के बाद धूप में अवश्य बैठना चाहिए। ताकि सूर्य की किरणों से इसकी पूर्ति हो सके।
  • विटामिन डी की कमी (Vitamin D deficiency) होने से शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसलिए इसकी पूर्ति के लिए अपनी नियमित डाइट व सूर्य की किरणों से इसकी उचित मात्रा में पूर्ति करना आवश्यक होता है।

विटामिन डी के मुख्य कार्य क्या है – Work for vitamin d deficiency in hindi

विटामिन डी की कमी क्या है| विटामिन डी के आहार | Vitamin D deficiency

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

हमारे शरीर में Vitamin D deficiency के कारण अनेक रोगो का खतरा बना रहता है विटामिन डी बॉडी का इम्यून सिस्टम मजबूत करके इन खतरों से बचाता है यह इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में बहुत उपयोगी होता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके सक्रमण और रोगों से बचाव करने में मददगार होता है।

डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए

यह शरीर में इंसुलिन के स्तर को कम करके डायबिटीज के खतरे से बचाने में मददगार होता है। डॉक्टर मानते हैं कि विटामिन डी टाइप 2 डायबिटीज के खतरे से हमें बचाने में हमारी सहायता करता है।

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हृदय रोग से बचाने के लिए

हार्ट  रोगों के खतरे से बचाने में विटामिन डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। उचित मात्रा में विटामिन D का सेवन करने से शरीर स्वस्थ बना रहता है और बीमारियों का खतरा कम होता है।

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कैंसर रोग से बचने के लिए

यह एक घातक रोग होता है। जिसका शुरुआती लक्षण आने पर अगर उपचार न किया जाए तो इसका हमारे शरीर पर बहुत बुरा और घातक प्रभाव पड़ता है। विटामिन D में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं। जो टयूमर सेल्स को बढ़ने से रोकते है। और कैंसर की क्रिया को भी गति हीन करते है। और ऐसी खतरनाक बीमारी से बचाने में सहायता करते है।

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में

विटामिन D शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूती प्रदान करता है। और थकान, तनाव और चिड़चिड़ापन दूर करके मन प्रसन्न और मजबूत बनाता है। इसलिए इसका उचित मात्रा में सेवन करना शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए आवश्यक है।

FAQ

Q 1. विटामिन डी कौन से फल में पाया जाता है?

Ans संतरा विटामिन डी युक्त फल होता है। इस के जूस का नियमित सेवन करने से यह हड्डियों को मजबूत करने वाले खनिज पदार्थों को अवशोषित करता है और यह शरीर को मजबूती और एनर्जी देने के लिए आवश्यक होता है। एक कप संतरे के जूस का नियमित सेवन करने से शरीर के लिए पर्याप्त विटामिन डी की मात्रा की पूर्ति हो जाती है।

Q 2. विटामिन डी नार्मल कितना होना चाहिए?

Ans  डॉक्टर या लैब टेक्नीशियन के मुताबिक ब्लड में विटामिन डी का नॉर्मल लेवल 50- 20 नैनोग्राम होना चाहिए। लेकिन अगर यह लेवल 20 नैनोग्राम तक पहुंच जाए तो इलाज की तुरंत आवश्यकता होती है।

Q 3.  विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत कौन सा है?

Ans शरीर में Vitamin D deficiency की पूर्ति करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत सूर्य की किरणें होती है जिसमें अल्ट्रा वायलट बी होता है जो शरीर में विटामिन डी को अवशोषित करने में सहायक होता है। इसके अलावा विटामिन डी के लिए नियमित डाइट में मशरूम, ओट्स, बादाम, सोया मिल्क, संतरे का जूस, मोटे अनाज, धूप में उगने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है।

इस आर्टिकल में लिखी गई तमाम जानकारियों को सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है अतः किसी भी सुझाव को आजमाने से पहले Doctor से परामर्श अवश्य करें।

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-: लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद :-

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