मेटाबोलिज्म क्या है | चयापचय क्या है और कैसे बढ़ाएं | Metabolism booster in hindi

चयापचय (मेटाबोलिज्म) क्या है और इसे कैसे बढ़ाएं बढ़ाने का तरीका (Metabolism booster tips in hindi)

अनियमित जीवनशैली और खान-पान के कारण शरीर का चयापचय मेटाबोलिज्म स्तर (Metabolism power) गड़बड़ा जाता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में होने वाली कई गतिविधियां मेटाबोलिज्म (चयापचय) से जुड़ी होती है। निरोगी हैल्थ के इस लेख में जानते हैं कि मेटाबोलिज्म क्या है, चयापचय क्या है और कैसे बढ़ाएं यह कैसे काम करता है बढ़ाने (Metabolism booster tips) के उपाय के बारें में जानते हैं आइए जानते हैं मेटाबोलिज्म क्या है | चयापचय क्या है और कैसे बढ़ाएं | Metabolism booster in hindi

मेटाबोलिज्म या चयापचय क्या है  (What is Metabolism in hindi)

मेटाबोलिज्म या चयापचय शरीर की कोशिकाओं में रासायनिक प्रतिक्रियाओं (Chemical process) का एक संग्रह है। शरीर को एक दिन में कितनी ऊर्जा की जरूरत होती है इसे ही शरीर की मेटाबॉलिज्म दर कहां जाता है। Metabolism को हिंदी में चयापचय कहा जाता है। चयापचय एक प्रकार की रासायनिक और शारीरिक प्रक्रिया होती है। जो हर प्रकार के प्राणी, जीव जंतु और पशुओं को अपने जीवन को स्वस्थ बनाने के लिए सहायक होती है।

यह मुख्य शारीरिक क्रियाएं जैसे पाचन, स्वसन, रक्त परिसंचरण, ब्लड सेल्स की वर्द्धि और शरीर की कोशिकाओं के विकास के लिए ऊर्जा की जरूरत की पूर्ति करते हैं। इसे ही शरीर की मेटाबॉलिज्म दर कहा जाता है।

शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलना ही मेटाबॉलिज्म या चयापचय कहलाता है। शरीर को भोजन पचाने, कार्य करने, रक्त परिसंचरण करने, श्वास व हार्मोन संतुलन जैसे सभी प्रकार के कार्यों के लिए उचित मात्रा में ऊर्जा की पूर्ति के लिए मेटाबॉलिज्म के स्तर का मजबूत होना आवश्यक होता है।

मेटाबोलिज्म कितने प्रकार के होते है (Types of Metabolism in hindi)

चयापचय (Metabolism) कोशिकाओं और इंसान को जीवित अवस्था में बनाए रखने के लिए सभी रासायनिक प्रतिक्रियाओं का वर्णन करने के लिए किया जाता है। चयापचय को मुख्यतः दो वर्गों में (Two Types of Metabolism) विभाजित किया गया है जैसे

1 अपचय Catabolism

शरीर भोजन से बड़े अणु जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं। इसी अणुओं के टूटने की क्रिया को अपचय कहा जाता है।

2 उपचय Anabolism

उपचय की इस क्रिया में ऊर्जा का उपयोग नई कोशिकाओं के निर्माण और विकास के लिए व शरीर के ऊतकों को बनाए रखने में किया जाता है। इस उपचय को मेटाबोलिज्म के रूप में जाना जाता है।

मेटाबोलिज्म क्या है | चयापचय क्या है और कैसे बढ़ाएं | Metabolism booster in hindi

मेटाबोलिज्म के कम होने के लक्षण क्या है (Symptoms of low Metabolism in hindi)

शरीर का मेटाबोलिज्म कमजोर होने के बहुत से लक्षण दिखाई देते है उनमे से कुछ मुख्य लक्षणों के बारे में जानते है जैसे

  • थकान बनी रहना
  • हाई कोलेस्ट्रॉल होना
  • मांसपेशियों में कमजोरी होना
  • त्वचा में रूखापन होना
  • वजन बढ़ना
  • जोड़ों में सूजन होना
  • अधिक तनाव व हृदय की धड़कन कम होना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना
  • पाचन तंत्र कमजोर होना
  • बालों का झड़ना
  • पीसीओडी की समस्या होना
  • डायबिटीज की समस्या भी हो सकती है। यह भी पढ़ें – डायबिटीज के आयुर्वेदिक उपचार

मेटाबोलिज्म बढ़ाने के घरेलू उपाय (Home Remedies to improve Metabolism in hindi)

अश्वगन्धा का सेवन 

अश्वगंधा चूर्ण का नियमित सेवन करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। यह सदियों पुरानी औषधि है इसका इस्तेमाल बहुत सी बीमारियों को ठीक करने के अलावा शरीर के मेटाबॉलिज्म के स्तर को सामान्य रखने में भी किया जाता है। नियमित रात को सोने से पहले दूध के साथ अश्वगंधा का सेवन करना लाभदायक होता है।

आँवला का सेवन 

आंवला शरीर के पाचन तंत्र के लिए एक उत्तम आहार होता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन बी कांपलेक्स, आयरन, कैल्शियम और कैरोटीन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म के स्तर को बनाएं रखते के साथ-साथ वजन भी नियंत्रित रखता है। आंवला का नियमित सेवन करने से मधुमेह नियंत्रित रहने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। यह भी पढ़ें – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय

मुलेठी का सेवन 

मुलेठी का नियमित सेवन करने से तनाव, सर्दी जुखाम मे राहत और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसका सेवन याददाश्त बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ रहने के लिए लाभदायक होता है। यह औषधीय गुणों का खजाना होती है। इसलिए मुलेठी का नियमित सेवन चयापचय के लिए करना लाभदायक होता है।

जायफल का सेवन 

इसका उपयोग मसालों के रूप में किया जाता है। इसका नियमित सेवन करने से वजन नियंत्रित रहने के साथ-साथ अच्छी नींद और हृदय संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है और शरीर का चयापचय नियंत्रित रहता है। यह भी पढ़ें – ह्रदय रोग में क्या खाएं और क्या नहीं खाना चाहिए

बादाम का सेवन 

बादाम में कैल्शियम, विटामिन, मैग्नीशियम, फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट, फास्फोरस और एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र में सुधार करता है। इसलिए नियमित बादाम का सेवन करने से हाई B P, दिल के रोग, स्किन संबंधी समस्याएं और मेटाबॉलिज्म के स्तर को नियंत्रित रखता है।

दालचीनी का सेवन 

यह एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। यह शरीर को शुद्ध करने के साथ-साथ सक्रमण से छुटकारा दिलाने, हृदय रोगों, इम्यून सिस्टम आदि समस्याओं में उपयोगी होती है। इसके नियमित सेवन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म का स्तर भी सामान्य रहता है।

मेटाबोलिज्म को सही रखने के लिए आहार (Metabolism Booster foods in hindi)

प्रोटीन युक्त आहार का सेवन 

अपने नियमित आहार में फैट की मात्रा में कमी करने और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने से वजन नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। इसके लिए प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना आवश्यक होता है। प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने से ज्यादा समय तक भूख नहीं लगती इससे शरीर का वजन नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिज्म के स्तर में भी सुधार होता है। यह भी पढ़ें – वजन घटाने के लिए क्या खाएं 

हरी पत्तेदार सब्जियां का सेवन 

सब्जियों में कैलोरी और फैट की मात्रा नियंत्रित होती है। इसी कारण यह आसानी से पेट भर देती है। इससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित रहता है। हरी सब्जियों में सिलेनियम, जिंक, आयरन और फाइबर उचित मात्रा में पाया जाता है। जो थायराइड ग्लैंड के लिए फायदेमंद होता है पत्तेदार हरी सब्जियां शरीर के मेटाबॉलिज्म के स्तर को बढ़ाती है। यह भी पढ़ें – थायराइड का रामबाण इलाज

सेव के सिरका का सेवन 

यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के उपायों में लाभदायक हो सकता है। सेब के सिरके में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसका नियमित सेवन करने से मोटापा की समस्या में राहत मिलने के साथ-साथ यह हृदय रोग, डायबिटीज, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है।

इसलिए नियमित खाना खाने से पहले एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर इसका सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहने के साथ-साथ चयापचय के स्तर में भी सुधार होता है।

फलिया और दालें का सेवन 

फलियों में आहार संबंधी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जिसके कारण पाचन सिस्टम ठीक से कार्य करता है और भोजन पचने में आसानी होती है। इसके अलावा दालों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है। यह फैट को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने में सहायता करता है।

फलियों और दलों के नियमित सेवन से शरीर को जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति होती है और मांसपेशियां मजबूत होने के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म में भी सुधार होता है और यह ब्लड शुगर के स्तर को भी सामान्य रखने में सहायक होते हैं। यह भी पढ़ें – मधुमेह रोग में क्या खाएं और क्या नहीं खाना चाहिए

कोकोनट ऑयल का सेवन 

मेटाबोलिज्म के स्तर को बढ़ाने में कोकोनट ऑयल अहम भूमिका निभाता है। इसमें बहुत से ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो लिवर में जाकर फैट को एनर्जी में परिवर्तन करने में सहायक होते हैं। इसलिए नियमित सुबह के समय 30 मिलीलीटर कोकोनट ऑयल का सेवन करने से शरीर स्वस्थ व मांसपेशियां मजबूत होकर मोटापा कम होता है।

मेटाबोलिज्म क्या है | चयापचय क्या है और कैसे बढ़ाएं | Metabolism booster in hindi

जीवन शैली में बदलाव

  • मेटाबोलिज्म के स्तर को बढ़ाने में लाल मिर्च अहम भूमिका निभाती है इसलिए अपने नियमित आहार के साथ साथ दही में लाल मिर्च डालकर इसका सेवन करना भी लाभदायक होता है।
  • दही, डेयरी उत्पाद, दालचीनी, दलिया आदि का नियमित सेवन करने से पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है।
  • सुबह के समय जल्दी उठने की आदत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और उठने के 1 घंटे बाद नाश्ता अवश्य करना चाहिए।
  • फास्ट फूड, जंक फूड, अधिक चिकनाई व मसालेदार, अधिक तले भुने खाने से बचना चाहिए।
  • अपने भोजन में नियमित सलाद, फल और फलों का ज्यूस अवश्य शामिल करना चाहिए।
  • कैलोरी को जलाने के लिए भोजन को लेने के समय में ज्यादा अंतराल नहीं होना चाहिए कभी भी भूखे न रहें 4 घंटे के बाद कुछ हल्का खाना आवश्यक होता है।
  • नियमित व्यायाम, योग व शारिरिक एक्टिविटी करने से शरीर में फैट की मात्रा कम होती है और मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। व शारिरिक एक्टिविटी तेज Fast करने से चर्बी जल्दी कम होती है।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद लेना मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक होता है।
  • ग्रीन टी का नियमित सेवन करना भी लाभदायक होता है।
  • नींबू पानी का सेवन दिन में दो से तीन बार करने से भी मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।
  • दिन में 3 से 4 लीटर ठंडा पानी पीने से भी चयापचय बढ़ता है।
  • कॉफी का सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
  • तुलसी की पत्तियों को चबाकर खाने से भी मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस आर्टिकल में हमने जाना मेटाबोलिज्म या चयापचय क्या है Metabolism कितने प्रकार का होता है इसको बढ़ाने के घरेलु उपाय तथा क्या खाने से मेटाबोलिज्म (Metabolism booster food) बढ़ता है। इस लेख के बारे में आपके कोई भी सवाल या सुझाव हो तो कमेंट में लिख सकते है।

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-: लेख को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद :-

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