किडनी रोग से बचने के उपाय |Kidney ko healthy kaise rakhe|in hindi

गुर्दे की बीमारी का इलाज (kidney disease treatment in hindi)

किडनी हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने का काम करती है। किडनी रोग से बचने के उपाय (kidney ko healthy kaise rakhe) बहुत से है। लेकिन हमें इस बारे में ज्ञान होना जरूरी है नही तो किडनी की बिमारियां होने से पूरा शरीर अस्वस्थ हो जाता है। इस लेख में कुछ सामान्य से किडनी रोग से बचने के उपाय है। जिन्हें अपनी जीवनशैली में अपनाकर kidney ko healthy रखा जा सकता है आईए जानते हैं किडनी रोग से बचने के उपाय |Kidney ko healthy kaise rakhe|in hindi

आज के समय में अनियमित खान-पान और बिगड़ी हुई जीवनशैली के कारण किडनी रोग से पीड़ित रोगियों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। किडनी की कार्य क्षमता कम होने से हमारे शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किडनी हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है।

शरीर के रक्त में जो भी विषाक्त पदार्थ होते हैं। उन्हें बाहर निकालने का महत्वपूर्ण कार्य किडनी द्वारा ही किया जाता है। किडनी के कई रोग बहुत गंभीर होते हैं। अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मौत भी हो सकती है।

किडनी रोग क्या है (What is Kidney Disease in hindi)

गुर्दे संबंधी कई प्रकार के रोगों के समूह को किडनी की बीमारी कहा जाता है। जब किडनी किसी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाए, ठीक से काम न कर पाए या काम करना बंद कर दें ऐसी स्थिति को किडनी रोग यानि किडनी की बीमारी का जाता है।

जब kidney में कोई समस्या हो जाती है तो किडनी प्रभावी रूप से अपशिष्ट पदार्थ को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती जिसके कारण शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन खराब हो जाता है। जो कई प्रकार के लक्षण पैदा करता है।

किडनी रोग के लक्षण (kidney disease symptoms in hindi)

  • गुर्दे संबंधी समस्याओं से जुड़े कुछ आम लक्षण इस प्रकार के होते हैं।
  • किडनी की समस्या होने पर जीभ, आंखों, गले, हाथों या पैरों में सूजन होना।
  • थकान महसूस होना व घबराहट होना
  • सांस लेने में कठिनाई होना
  • मूत्र से संबंधी समस्याएं उत्पन्न होना
  • रक्त में पोटेशियम की मात्रा बढ़ना
  • यूरिन इन्फेक्शन होना पेशाब कम आना या बंद होना
  • शरीर में सूजन होना सांस फूलना
  • सुबह उठने पर आंखों के चारों तरफ व चेहरे पर सूजन होना
  • शरीर में खुजली होना व लाल निशान होना
  • भूख न लगना और हाजमा अनियंत्रित होना
  • खून की कमी होना और शरीर पीला पड़ना
  • त्वचा में सुखासन और पपड़ी बनना
  • शरीर का वजन कम होना

किडनी रोग के कारण (Kidney disease causes in hindi)

गुर्दे की बीमारी को मुख्य रूप से दो रूपों में वर्गीकृत किया गया है। एक एक्यूट किडनी रोग और क्रोनिक किडनी रोग

एक्यूट किडनी रोग

गुर्दे में अचानक तीव्र होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति को किडनी की बीमारी कहा जाता है। कुछ मामलों में ऐसी समस्या थोड़े अंतराल के लिए रहती है। जबकि कुछ में लंबे समय तक इसके मुख्य कारण नशीली दवा, गंभीर इंफेक्शन या किसी रेडियो एक्टिव डाई के कारण किडनी के उत्तक क्षतिग्रस्त होना व मूत्र को किडनी से बाहर ले जाने वाले रास्ते में रुकावट आ जाना आदि इसके मुख्य कारण है।

क्रोनिक किडनी रोग

इस रोग में गुर्दे कुछ वर्षों में खराब होते हैं। इस समस्या के आखिरी चरणों में किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर देती है। और रोगी को जीने के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ती है।

इसके मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर के कारण किडनी से जुड़ी रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाना, डायबिटीज, न्यूरोपैथी किसी रोग या इम्यूनिटी संबंधी समस्या के कारण किडनी में सिस्ट बनने के कारण और किडनी या मूत्र प्रणाली में किसी प्रकार की असामान्यता होना इसके मुख्य कारण होते हैं।

किडनी रोग से बचने के उपाय |Kidney ko healthy kaise rakhe|in hindi

किडनी को मजबूत करने के लिए क्या खाएं (Kidney disease treatment food in hindi)

संतुलित आहार

गुर्दे की बीमारी से बचने के लिए पोस्टिक आहार का नियमित सेवन करना चाहिए और ताजे फलों का सेवन करें व नियमित हरी सब्जियों के साथ-साथ सूप का भी सेवन करना लाभदायक होता है। मुख्य रूप से दाल के सूप का सेवन जरूर करना चाहिए। अपने आहार में रिफाइंड खाद्य पदार्थों, वसा, चीनी, नमक आदि का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।

इसके अलावा तरल पदार्थों का सेवन भी प्रचुर मात्रा में करना लाभदायक होता है। मैग्नीशियम युक्त चीजें जैसे गहरे रंग की सब्जियों और फलों का नियमित सेवन करें क्योंकि मैग्नीशियम किडनी को ठीक से कार्य करने में मददगार होता है। फलों में अंगूर का ज्यादा सेवन करें अंगूर किडनी से फालतू यूरिक एसिड निकाल देता है। यह पढ़ें ~ सूप पिने के फायदे 

तरल पदार्थों का सेवन

शरीर को शुद्ध रखने और विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने के लिए तरल पदार्थ का उचित मात्रा में सेवन करना लाभदायक होता है। क्योंकि शरीर में विषाक्त तत्वो के कारण ही रोग उत्पन्न होते हैं। नियमित तौर पर 12 से 15 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए।

पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से यूरिन पतला होता है। एवं शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने और किडनी की पथरी को बनने से रोकने में भी मदद मिलती है। इसके साथ ही नियमित जूस आदि का सेवन करना लाभदायक होता है। यह पढ़ें ~ यूरिक एसिड क्या है और इसका घरेलू उपचार

धूम्रपान व नसीले पदार्थों का सेवन न करे

किडनी के रोगों से बचने के लिए धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करना चाहिए। धूम्रपान करने से एथिरोस्क्लिरोसिस होने की संभावना बढ़ती है। यह किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर देता है। जिसके कारण किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होती है।

इसके अलावा नशीले पदार्थों व प्रतिबंधित दवाओं के सेवन से भी किडनी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। और किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए किडनी रोगों से बचने के लिए ऐसी सामग्रियों का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।

वजन संतुलित रखे

ऐसी खतरनाक बीमारियों से बचने के लिए अपना वजन नियंत्रित रखना बहुत आवश्यक होता है। क्योंकि मोटापा बहुत सी बीमारियों को जन्म देता है। जैसे मधुमेह, हृदय रोग, किडनी रोग, लिवर रोग आदि इसलिए वजन को कंट्रोल कर के स्वस्थ रहने के साथ-साथ ऐसी खतरनाक बीमारियों से भी बचा जा सकता है। इसलिए अपने वजन को बढ़ने न दें और नियंत्रित रखें। यह पढ़ें ~ वजन घटाने के लिए डाइट प्लान

योग और व्यायाम

शरीर को बीमारियों से मुक्त रखने में योग और व्यायाम काफी मददगार होते हैं। इसलिए नियमित रूप से व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां रक्तचाप को सामान्य रखने के साथ-साथ रक्त शर्करा को भी नियमित करने में सहायक होता है।

ऐसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा आदि रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है। नियमित योगासन प्राणायाम और व्यायाम करने से शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने के साथ-साथ ऐसी खतरनाक बीमारियों से भी बचाव किया जा सकता है।

किडनी का नियमित चेक अप

किडनी के रोग अक्सर छुपे हुए और गंभीर होते हैं। इसके अंतिम चरण तक पहुंचने तक इसमें किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते। किडनी की बीमारियों की रोकथाम और शीघ्र निदान के लिए नियमित रूप से किडनी का चेकअप करवाना सबसे शक्तिशाली और प्रभावी उपाय होता है।

जिन लोगों की उम्र 40 वर्ष से अधिक है और जो व्यक्ति मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापे आदि रोगों से ग्रस्त है। ऐसे उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए वार्षिक चेकअप करवाना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि किडनी की बीमारी और उसके निदान के लिए सबसे अच्छा उपाय है। कि साल में एक बार रक्त की जांच खून में क्रिएटिन को मापना और पेशाब प्रशिक्षण करवाना जिंदगी जीने का हिस्सा बना ले।

यह भी पढ़ें ~ यूरिन इन्फेक्शन के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार 

इस आर्टिकल में लिखी गई तमाम जानकारियों को सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। अतः किसी भी सुझाव को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लेवे।

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